मुसलमानों ने केक काटकर बनाया RSS प्रमुख मोहन भागवत का जन्मदिन

मेरठ में शनिवार को राष्ट्रीय हिंदू मुस्लिम एकता मंच के बैनर तले मुस्लिम समाज के लोगों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत का जन्मदिन मनाया। कमिश्नरी पार्क में केक काटा और उनका बर्थडे सेलिब्रेट किया।

कमिश्नरी पार्क में राष्ट्रीय मुस्लिम एकता मंच के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद रिहान खान, परवेज अली, शाहनवाज खान, तबस्सुम अंसारी ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के जन्मदिन के उपलक्ष में केक काटा और खुशियां मनाई। इस दौरान काफी संख्या में मुस्लिम महिलाएं और अन्य लोग भी शामिल हुए।

मोहम्मद रिहान खान ने कहा कि पिछले कुछ सालों में आरएसएस प्रमुख के द्वारा मुसलमानों के लिए जो हमदर्दी दिखाई जा रही है। वह सराहनीय है। पिछले दिनों एक कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कहा था कि हम भारतीयों का डीएनए एक है। हमारे पूर्वज यहीं से है। इस मैसेज से मुस्लिमों में एक अच्छा मैसेज आएगा और हिंदू मुस्लिम जो आपस में दूरियां है, वह धीरे-धीरे खत्म होती चली जाएगी।

इसी बात को ध्यान में रखते हुए एक पहल मंच की ओर से की गई और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का जन्मदिन मनाया। कहा कि हमें अपने देश के अच्छे लोगों की सराहना करनी चाहिए और कट्टरपंथियों को हिंदू मुस्लिम को आपस में लड़ाने का मौका नहीं देना चाहिए। इस दौरान मोहम्मद शमशाद, रेशमा खान, निगहत, तबस्सुम अंसारी, तहरीन, जय भगवान, अंजलि, पूनम, रजा, फरदीन गाजी मौजूद रहे।

तीन भाईयों और एक बहन में मोहनराव भागवत जी सबसे बड़े हैं. उनके एक भाई अभी चंद्रपुर में संघ का काम देखते हैं. खुद मोहनराव भागवत की शिक्षा दीक्षा चंद्रपुर से हुई और उन्होंने लोकमान्य तिलक विद्यालय से प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की. बीएससी भी उन्होंने चंद्रपुर से ही किया लेकिन आगे की पढ़ाई के लिए वे नागपुर चले आये. नागपुर में उन्होंने एमवीएससी की पढ़ाई की.

एमवीएससी करने के बाद दो महीने के लिए मोहनराव चंद्रपुर लौटे और वहां के जिला पशु अस्पताल में प्रैक्टिस किया लेकिन दो महीने बाद वे गढचिरौली में एक्सटेंशन आफिसर के तौर पर नियुक्त हो गये. यहां उन्होंने डेढ़ साल तक सरकारी नौकरी की. लेकिन मोहनराव ने नागपुर में अपनी पढ़ाई के दौरान ही तय कर लिया था कि वे संघ के प्रचारक बनेंगे और उन्होंने वही किया. 1975 में इमरजंसी में भूमिगत कार्यकर्ता के तौर पर काम करते हुए आपातकाल की समाप्ति के बाद वे संघ में बतौर प्रचारक कार्यरत हो गये.

अकोला में जिला प्रचारक रहे, फिर संघ की रचना में जिस तरह से प्रांतों का निर्माण किया है उसमें विदर्भ एक अलग प्रांत है. वे विदर्भ के प्रांत प्रचारक रहे. विदर्भ के प्रांत प्रचारक रहते हुए वे नागपुर के संघ मुख्यालय के संपर्क में लगातार बने रहे. विदर्भ के बाद वे बिहार के क्षेत्र प्रचारक रहे. 1987 में संघ की केन्द्रीय कार्यकारिणी में आ गये और अखिल भारतीय सह शारिरीक प्रमुख के बतौर काम करने लगे. केन्द्रीय कार्यकारिणी में उन्होंने 1991 से 1999 तक शारीरिक प्रमुख के रूप में काम किया फिर एक साल के लिए प्रचारक प्रमुख हुए. सन 2000 में जब सुदर्शन सरसंघचालक बने तो मोहनराव भागवत सरकार्यवाह बनाये गये. 2000 से 2009 तक वे तीन संघ के सरकार्यवाह बने रहे.