मां ने चलती ट्रेन से फेंका 1 साल का मासूम बेटा, पिता ने कूदकर बचाई जान

पूरी दुनिया में एक मां के लिए उसकी संतान ही पूरी दु’-निया होती है। एक मां अपने बच्चे की रक्षा के लिए कुछ भी कर सकती है लेकिन इस क’लयुग के समय पर कुछ ऐसे भी मामले देखने को मिलते हैं जो मां की ममता को श’-र्मसार कर देते हैं। हाल ही में एक मामला सामने आया है जिसमें एक मां ने अपने बच्चे को चलती हुई ट्रेन में से बाहर फें’क दिया लेकिन बच्चे के लिए फरिश्ता बनकर उसका पिता उसके पीछे कूद गया और उसकी जान बचा ली। इस घ’टना के बाद चारों तरफ यह खबर तेजी से फैल गई। आपको बताते हैं आखिर क्या रहा पूरा मामला।

दरअसल मां की ममता को शर्मसार कर देने वाला यह मामला उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले का है जहां एक माही अपने बेटे की खून की प्या’सी हो गई। यह घटना यमुनानगर के छिवकी जंक्शन की है। दरअसल एक महिला अपने पति और बेटे के साथ ट्रेन में बैठी जिसके बाद थोड़ी देर में ही उसने अपने 1 साल के मासूम को चलती हुई ट्रेन से बाहर फेंक दिया।

1 साल के मासूम को बाहर फेंकते हुए उसके पिता ने देखा तो बिना कुछ सोचे समझे अपने बेटे के पीछे कूद गया और उसकी जा’न बचा ली। हालांकि 1 साल की इस मासूम को हल्की खरोच आई है लेकिन वह स्वस्थ है। मां के द्वारा बच्चे को रेलवे स्टेशन पर लेकर आया जहां आरपीएफ और जीआरपी के जवान मौजूद थे उन्होंने बच्चे को नजदीकी अस्पताल में पहुंचाया जहां प्रा’थमिक उपचार के बाद बच्चे को घर भेज दिया गया। फिलहाल बच्चा खतरे से बाहर है और उसकी हालत एकदम बढ़िया है।

यह घटना प्रयागराज के छि’वकी जंक्शन की है जहां सुबह 7: 43 पर जनता एक्सप्रेस मुंबई की तरफ जा रही थी जिसमें मिर्जापुर से कोच संख्या बिट्टू में सीट संख्या 41 और 42 पर शिवम और उसकी पत्नी अंजू सिंह अपने 1 साल के मासूम बच्चे के साथ मुंबई जा रहे थे। मासूम का पिता शिवम मुंबई में एक सिक्योरिटी गार्ड के तौर पर काम करता है। कुछ समय पहले भारत बंद होने के बाद वह अपने घर लौट आया था और अब वा’पस मुंबई जा रहा था।

चलती हुई ट्रेन में उसका बेटा बार-बार रो रहा था तब शिवम ने अपनी पत्नी से 1 साल के मासूम को दूध पिलाने को कहा और पत्नी ने मना कर दिया और विवाद बढ़ गया तभी गुस्से में आकर महिला ने मासूम को अचानक चलती हुई ट्रेन से फेंक दिया। गनीमत रही कि उस समय ट्रेन की रफ्तार ज्यादा नहीं थी वरना तो बहुत बड़ी अनहोनी भी हो सकती थी। यह नजारा देखकर हर कोई ह’क्का-बक्का रह गया तभी ब’च्चे को बचाने उसका पिता ट्रेन से कू’द गया और 100 मीटर तक दौड़ कर बच्चे को उठा लिया। भगवान के अवतार कहे जाने वाले बच्चों को बचाने उसका पिता फरिश्ते के रूप में आया।