मिलिए राष्ट्रीय लोक अदालत की पहली ट्रांसजेन्डर जज

कल तक किसी को ट्रांसजेंडर होने की वजह से जलालत उठानी पड़े और आज वह जज बन जाए। तो इसे आप क्या कहेंगे? किस्मत। यही ना। लेकिन, यह सच नहीं है। पश्चिम बंगाल की एक कोर्ट में जज बनीं जोइता मंडल पर किस्मत कतई मेहरबान नहीं थी। जोइता आज जिस मुकाम पर हैं उसको हासिल करने के लिए बड़ी मेहनत हासिल की है।

उन्होंने तिरस्कार और अपमान झेला है। वह ऐसी शख्स हैं जिनकी पहचान ट्रांसजेंडर्स के रूप में है। इसलिए इन्हें इस कामयाबी को हासिल करना और भी कठिन था। लेकिन, इन तमाम दुश्वारियों को नकारते हुए जोइता मंडल ने जज बनने तक का सफर तय किया है।

एक ट्रांसजेन्डर के रूप में जोइता मंडल का राष्ट्रीय लोक अदालत तक का सफर बहुत आसान नहीं था। कभी उन्होंने जीवन यापन चलाने के लिए दरवाजे-दरवाजे भीख भी मांगी है। लोगों की दुत्कार और तिरस्कार भी सहे हैं। जब अपमान की सीमा हद से ज्यादा बढ़ गयी तो सोशल वर्कर बनने की ढानी। और एक दिन ऐसा भी आया कि राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए जज चुन ली गयीं। ये सब जोइता ने इसी जिंदगी में देखा है।

जब कार से पहुंची कोर्ट लोगों की आंखेें फटी रह गयीं

शानिवार को जजशिप ऑन ड्यूटी यानी ड्यूटी पर न्यायाधीश लिखे लाल प्लेट लगी सफेद कार से जोइता इस्लामपुर कोर्ट परिसर जब जोइता की कार पहुंची तो उनकी आंखों में कामयाबी के आंसू थे। यह ट्रांसजेंडर्स के लिए सेलिब्रेशन का मौका भी था। भारतीय लोकतंत्र की यह खूबसूरती का यह नायाब नमूना भी है जो देश के हर नागरिक को समानता का अवसर प्रदान करता है।

होटल में नहीं मिला कमरा, सोना पड़ा जमीन पर

पश्चिम बंगाल में लोक अदालत की इस्लामपुर की सब-डिविजनल लीगल सर्विस कमिटी ने जोइता को बेंच जज के लिए नियुक्त किया है। यह महज संयोग ही है कि जोइता का दफ्तर उस बस स्टैंड से सिर्फ 10 मिनट की दूरी पर है जहां कभी उन्हें जमीन पर सोना पड़ा था, क्योंकि उनके ट्रांसजेंडर होने की वजह से उन्हें होटल में रूम नहीं मिले थे। इसी घटना ने जोइता की जिंदगी बदल दी थी और उन्होंने सोशल वर्कर के रूप में अपने जैसे और भी दूसरे लोगों के हक लिए लडऩे का बिगुल फंूका।

दिजनापुर नोतुन आलो सोसाइटी बनायी

जोइता ने अधिकारों की लड़ाई के लिए दिजनापुर नोतुन आलो सोसाइटी बनाई। यह उसकी फाउंडिंग चेयरमैन भी रही हैं। इस सोसाइटी के जरिए वह ट्रांसजेंडर समुदाय से संबंधित मुद्दों पर 2011 से काम कर रही हैं। इस्लामपुर की सब-डिविजनल लीगल सर्विस कमिटी ने जोइता को सोशल वर्कर बताते हुए “लन्र्ड जज” की केटेगरी में रखा है। अब जबकि जोइता एक मुकाम पर पहुंच गयी हैं वह कहती हैं कि मुझे इस बात का गर्व है और मेरा चयन लिंग भेद के खिलाफ समाज को एक सख्त संदेश देगा।